*4.51 करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी, बलरामपुर DEO मनीराम यादव हटाए गए*

*4.51 करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी, बलरामपुर DEO मनीराम यादव हटाए गए* *कलेक्टर की जांच में खरीदी प्रक्रिया और भुगतान में अनियमितताएं मिलीं; नरेंद्र कुमार निरापुरे को मिली DEO की जिम्मेदारी*

*4.51 करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी, बलरामपुर DEO मनीराम यादव हटाए गए*

*4.51 करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी, बलरामपुर DEO मनीराम यादव हटाए गए*

कलेक्टर की जांच में खरीदी प्रक्रिया और भुगतान में अनियमितताएं मिलीं; नरेंद्र कुमार निरापुरे को मिली DEO की जिम्मेदारी

लोक सीजी न्यूज / रायपुर, 28 सितम्बर 2026 :- बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव को 4.51 करोड़ रुपए की खरीदी में अनियमितताओं के मामले में पद से हटा दिया गया है।

          कलेक्टर की जांच में खरीदी प्रक्रिया और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने यह कार्रवाई की है। उनकी जगह प्राचार्य नरेंद्र कुमार निरापुरे को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, मनीराम यादव को शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल परसा, विकासखंड अंबिकापुर में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है।

मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा विभाग को छह योजनाओं के तहत मिले 4.57 करोड़ रुपए के बजट से की गई खरीदी से जुड़ा है। इस राशि से छात्राओं के लिए साइकिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सामग्री, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान खरीदे जाने थे।

जांच में खरीदी और भुगतान से जुड़ी कई अनियमितताएं मिलीं

कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता और जिला कोषालय अधिकारी दशरथ सोनी ने मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, खरीदी प्रक्रिया में जेम (GeM) पोर्टल के नियमों का पालन नहीं किया गया। क्रय समिति गठित किए बिना और सामग्री का भौतिक सत्यापन किए बगैर भुगतान किए गए। कई सामग्रियों की स्टॉक रजिस्टर में एंट्री भी नहीं मिली।

जांच में कैशबुक में कटिंग, ओवरराइटिंग और बिना प्रमाण के सुधार पाए गए। कार्यालय के लिपिकों ने भी कई सामग्रियों की खरीदी और प्राप्ति की जानकारी होने से इनकार किया।

रिपोर्ट में 42 लाख रुपए की विज्ञान किट और 4025 साइकिलों की खरीदी के लिए किए गए 1.62 करोड़ रुपए के भुगतान का उल्लेख है। जांच के दौरान विज्ञान किट का भौतिक सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर में उसकी एंट्री नहीं मिली। इसी तरह, साइकिलों के भुगतान से संबंधित चालान और स्टॉक एंट्री भी उपलब्ध नहीं थे।

स्टेशनरी के नाम पर किए गए 11.20 लाख रुपए के भुगतान के संबंध में कोटेशन और स्टॉक एंट्री नहीं मिली। परीक्षा की मुद्रण सामग्री के लिए रांची की एक फर्म को 17.96 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इसके अलावा, शिक्षा विभाग की बैठकों में नाश्ते पर करीब 4 लाख रुपए खर्च किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई।

अलग-अलग जिलों में चार बार निलंबित हो चुका है यह भ्रष्ट अधिकारी

जांच रिपोर्ट में कई भुगतान ऐसे पाए गए, जिनसे संबंधित सामग्री कार्यालय या भंडार गृह में उपलब्ध नहीं थी। कुछ मामलों में डिलीवरी चालान नहीं मिले। वहीं, कई बिलों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर 50-50 हजार रुपए के भुगतान किए गए। जांच में इसे खरीदी प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितता के रूप में दर्ज किया गया है।

मनीराम यादव के खिलाफ इससे पहले 2.42 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप भी सामने आए थे। अलग-अलग जिलों में पदस्थापना के दौरान वे चार बार निलंबित भी हो चुके हैं।

वर्तमान मामले में जांच के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद राज्य सरकार ने उन्हें प्रभारी DEO के पद से हटाकर प्राचार्य के पद पर पदस्थ कर दिया है।