*छत्तीसगढ़ की पहली फैमिली ओपन जेल शुरू, अब परिवार के साथ रहेंगे बंदी*
*छत्तीसगढ़ की पहली फैमिली ओपन जेल शुरू, अब परिवार के साथ रहेंगे बंदी* *सुबह काम पर जाएंगे, शाम को जेल लौटेंगे; पहले महीने का राशन जेल विभाग देगा, इसके बाद खुद उठाएंगे परिवार की जिम्मेदारी*
*छत्तीसगढ़ की पहली फैमिली ओपन जेल शुरू, अब परिवार के साथ रहेंगे बंदी*
*सुबह काम पर जाएंगे, शाम को जेल लौटेंगे; पहले महीने का राशन जेल विभाग देगा, इसके बाद खुद उठाएंगे परिवार की जिम्मेदारी*
लोक सीजी न्यूज / जशपुर/अंबिकापुर, 2 अक्टूबर 2026, जेल की चारदीवारी के भीतर बंदियों को अब परिवार से दूर रहकर सजा नहीं काटनी पड़ेगी। वे परिवार के साथ रहकर रोजगार कर सकेंगे और शाम को वापस जेल लौटेंगे। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर शुक्रवार को अंबिकापुर केंद्रीय जेल में छत्तीसगढ़ की पहली फैमिली ओपन जेल (परिवार खुली जेल) शुरू की गई। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया। फिलहाल इस व्यवस्था में दो बंदियों को उनके परिवार के साथ रहने की सुविधा मिलेगी।
छत्तीसगढ़ शासन के सेवा संकल्प अभियान के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बंदियों को सजा के दौरान ही आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत बंदी सुबह रोजगार या अन्य काम के लिए जेल से बाहर जा सकेंगे और शाम को निर्धारित समय पर वापस लौटेंगे। इस तरह उन्हें परिवार के साथ रहने के साथ रोजगार करने का भी अवसर मिलेगा।
पहले महीने का राशन जेल विभाग देगा, फिर खुद कमाकर चलाएंगे घर
फैमिली ओपन जेल में रहने वाले बंदियों और उनके परिवारों को जेल विभाग की ओर से जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। परिवार को शुरुआती एक महीने का राशन भी विभाग देगा। इसके बाद बंदियों को रोजगार से होने वाली कमाई से अपने परिवार के लिए राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था खुद करनी होगी।
बंदियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जेल विभाग अवसर मुहैया कराएगा। इसके अलावा उन्हें वैकल्पिक रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बंदी जेल में रहते हुए ही काम करने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हो सकेंगे।
परिवार के साथ रहकर सुधार का मौका
अंबिकापुर केंद्रीय जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग कर यह व्यवस्था शुरू की गई है। इसका मकसद बंदियों को परिवार से जोड़कर उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना और रिहाई के बाद सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार करना है। परिवार के साथ रहने से बंदियों को सामाजिक और भावनात्मक सहयोग भी मिलेगा। जेल विभाग भविष्य में इस सुविधा का विस्तार करने की योजना बना रहा है, ताकि अधिक बंदियों को इसका लाभ मिल सके।
बंदियों ने डीजी जेल का पोट्रेट बनाकर भेंट किया
कार्यक्रम के दौरान अंबिकापुर जेल परिसर स्थित सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स में बंदियों द्वारा तैयार किया गया डीजी जेल हिमांशु गुप्ता का पोट्रेट उन्हें भेंट किया गया। बंदियों की कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाला यह प्रयास कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत सहित जेल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।