*तिरंगा ‘टेट मुक्ति रैली’ में जुटे शिक्षक, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति की मांग*

*तिरंगा ‘टेट मुक्ति रैली’ में जुटे शिक्षक, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति की मांग*

*तिरंगा ‘टेट मुक्ति रैली’ में जुटे शिक्षक, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति की मांग*
जशपुर में प्रदर्शन करते शिक्षक

*तिरंगा ‘टेट मुक्ति रैली’ में जुटे शिक्षक, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति की मांग*

लोक सीजी न्यूज / जशपुर 25 अगस्त 2026 :- आज छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जशपुर जिला मुख्यालय में शिक्षकों ने तिरंगा ‘टेट मुक्ति रैली’ निकालकर अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

        रैली में जिले के विभिन्न संवर्गों के सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधान पाठक और व्याख्याता बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा, पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया।

रैली के बाद शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि पूर्व में भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी अनिवार्य नहीं थी, लेकिन अब सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति को इससे जोड़ने से हजारों शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। उन्होंने शासन से इसका स्थायी समाधान करने की मांग की।

टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने समेत रखीं कई मांगें

ज्ञापन में शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, पूर्व सेवा अवधि की गणना कर पूर्ण पेंशन व अन्य सेवा लाभ देने, केंद्र के समान वेतनमान लागू करने तथा वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की। इसके साथ ही 13 फरवरी 2026 को जारी भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षक हित में आवश्यक संशोधन और सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति के लिए बीएड ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की मांग भी रखी गई।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव, विनय सिंह और सह-संयोजक कुंदन गुप्ता ने कहा कि शिक्षकों की मांगें किसी एक संवर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से जुड़ी हैं। उन्होंने शासन से संवेदनशीलता के साथ विचार कर मांगों का शीघ्र निराकरण करने की अपील की।

शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय तक टीईटी अनिवार्य नहीं रही और नियमित रूप से परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण भी कई शिक्षक इससे वंचित रहे। ऐसे में वर्तमान नियमों से शिक्षकों की सेवा और पदोन्नति प्रभावित न हो, इसके लिए शासन को राहत देने की दिशा में निर्णय लेना चाहिए। रैली में शिक्षकों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें शासन तक पहुंचाईं और शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई।