*सेवा, समर्पण और राष्ट्र चेतना के साधकों का सम्मान* *2021 से 2026 तक पांच विभूतियों और संस्थाओं को मिला ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण*

*सेवा, समर्पण और राष्ट्र चेतना के साधकों का सम्मान* *2021 से 2026 तक पांच विभूतियों और संस्थाओं को मिला ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण*

*सेवा, समर्पण और राष्ट्र चेतना के साधकों का सम्मान*  *2021 से 2026 तक पांच विभूतियों और संस्थाओं को मिला ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण*

*सेवा, समर्पण और राष्ट्र चेतना के साधकों का सम्मान*

*2021 से 2026 तक पांच विभूतियों और संस्थाओं को मिला ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण*

लोक सीजी न्यूज। जैन संत परंपरा के महान आध्यात्मिक विभूति परम पूज्य आचार्य विद्यासागरजी महाराज के 50वें आचार्य पदारोहण वर्ष (2021-22) के ऐतिहासिक अवसर पर जबलपुर में स्थापित ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों के सम्मान का विशिष्ट मंच बनकर उभरा है। वर्ष 2021 से 2026 तक इस अलंकरण के माध्यम से समाजसेवा, जीव दया, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली पांच विभूतियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जा चुका है।

आचार्यश्री के जीवन दर्शन, अहिंसा, संयम, करुणा, राष्ट्रीय चेतना और ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह सम्मान अपने स्थापना काल से ही विशिष्ट पहचान बना रहा है। अलंकरण के अंतर्गत सम्मानित व्यक्ति अथवा संस्था को विशेष रूप से निर्मित स्वर्ण एवं रजत पदक, अभिनंदन पत्र और एक लाख रुपए की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।

इस सम्मान का उद्देश्य उन व्यक्तियों और संस्थाओं के योगदान को रेखांकित करना है, जिन्होंने राष्ट्रीय सेवा, मानव कल्याण, विश्व शांति, शाकाहार के प्रचार-प्रसार, जीव दया, प्राणी संरक्षण तथा पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए हैं।

पांच वर्षों में पांच विशिष्ट सम्मान, सेवा के विविध आयामों को मिली पहचान

2021 : अशोक पाटनी को प्रथम अलंकरण

अलंकरण के प्रथम वर्ष में किशनगढ़-मदनगंज के प्रख्यात उद्योगपति एवं आर.के. मार्बल वंडर ग्रुप के चेयरमैन अशोक पाटनी को सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के बाढ़ प्रभावित गरीब परिवारों के लिए 200 मकानों का निर्माण, विधवा महिलाओं को आजीवन पेंशन तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति जैसे जनकल्याणकारी कार्य उनके सेवा भाव के प्रमुख उदाहरण हैं।

2022 : डॉ. प्रकाश आमटे का सम्मान

दूसरे वर्ष अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवी एवं लोकबिरादरी प्रकल्प के प्रणेता डॉ. प्रकाश आमटे को अलंकृत किया गया। उनकी धर्मपत्नी डॉ. मंदाकिनी आमटे के साथ आदिवासी समुदायों की सेवा और जीव दया के क्षेत्र में किया गया कार्य मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।

2023 : कैलाश मानव को पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मान

तीसरे वर्ष पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जयपुर के कैलाश मानव को सम्मानित किया गया। पर्यावरण के प्रति जागरूकता और प्रकृति संरक्षण के लिए उनके दीर्घकालीन प्रयासों को इस सम्मान के माध्यम से सराहा गया।

2024 : दयोदय महासंघ, भोपाल को अलंकरण

चौथे वर्ष जीव दया और गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय संस्था दयोदय महासंघ, भोपाल को सम्मान प्रदान किया गया। संस्था द्वारा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गौशालाओं के संचालन तथा निराश्रित, घायल और बीमार पशुओं की देखभाल के लिए किए जा रहे कार्य उल्लेखनीय हैं। समारोह रायपुर में आयोजित हुआ था।

2026 : मोहन भागवत को राष्ट्रसेवा के लिए सम्मान

पांचवें अलंकरण के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को राष्ट्रव्यापी सेवाओं और राष्ट्र जागरण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भोपाल में आयोजित समारोह परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद, सानिध्य और मंगल निर्देशन में संपन्न हुआ। इस गरिमामय आयोजन में देशभर से संतगण, विद्वान और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

सेवा और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ का आयोजन विद्यासागरोदय विद्यायतन समाधि स्मारक समिति, डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) की ओर से किया जाता है। समिति शिक्षा, साहित्य, सेवा और संस्कार के क्षेत्र में आचार्यश्री के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत है।

पिछले वर्षों में सम्मानित विभूतियों और संस्थाओं का कार्यक्षेत्र भले ही अलग-अलग रहा हो, लेकिन उनके प्रयासों में मानवता, करुणा, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना समान रूप से दिखाई देती है। यही इस अलंकरण की मूल भावना है, जो आचार्यश्री के विचारों को सामाजिक जीवन में साकार करने की प्रेरणा देती है।