यात्रियों से शुल्क लेकर ही चल रहा शहर में शुलभ शौचालय, प्रशासन के दावे के उलट हैं वास्तविक हकीकत

यात्रियों से शुल्क लेकर ही चल रहा शहर में शुलभ शौचालय
प्रशासन के दावे के उलट हैं वास्तविक हकीकत
शुलभ संचालक को 90 हजार रुपए हर माह यात्रियों से वसूलकर देने पड़ते है निर्माता कंपनी को

एक्सक्लूसिव न्यूज द्वारा राजेश अग्रवाल
पत्थलगांव/ लोक सीजी न्यूज. शहर के एक मात्र बस स्टैन्ड के एक छोर में बनाया गया शुलभ कांम्प्लेक्स से हर माह वहां के संचालक द्वारा 90 हजार रुपए यात्रियों से वसूलकर शुलभ कंस्ट्रक्शन विभाग को देने पड़ रहे हैं, यह राशि जशपुर में स्थित शुलभ कंस्ट्रक्शन के कार्यालय में हर माह जमा कराए जाते है। 
                      पत्थलगांव बस स्टैंड स्थित शुलभ कांम्प्लेक्स के संचालक द्वारा तीन हजार रुपए प्रतिदिन यात्री एवं अन्य लोगों से शौच क्रिया के नाम पर वसूलकर उसे जशपुर शुलभ कंस्ट्रक्शन कार्यालय मे जमा कराया जाता है। इस शुल्क में शुलभ कांम्प्लेक्स आने वाले महिला हो या पुरूष उनसे 5/- रुपए यूरिन के और 10/- रुपए लैट बॉथ के एवं 20/- रुपए नहाने के लिए जाते हैं। इस रकम से प्रति रोज तीन हजार रुपए जमा करने के बाद उसे शुलभ कंस्ट्रक्शन कार्यालय मे भेजा जाता है। 

शौचक्रिया के एवज में शुल्क ना लेने की बात पूरी तरह गलत 

ऐसे में महिला या पुरूष यात्रियों से शौचक्रिया के एवज में शुल्क ना लेने की बात पूरी तरह गलत साबित हो रही है। दरअसल शहर के बस स्टैंड में पिछले एक दशक से शौचक्रिया निपटाने के लिए यात्री महिलाओ को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस समस्या की ओर से पिछले दस सालों के दौरान विधायक, सांसद, नगर पंचायत अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का कई बार ध्यानाकर्षण कराया जा चुका है। सांसद रहने के दौरान वर्तमान विधायक गोमती साय ने भी खनिज न्यास निधि से महिला यात्रियों के लिए बस स्टैंड के भीतर शुलभ शौचालय बनाने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन सांसद की मांग पर भी शासन-प्रशासन ने किसी तरह का ध्यान नहीं दिया। हालात यह है कि लंबी दूरी का सफर करने के बाद जब बसें शहर के बस स्टैन्ड मे पहुंचती हैं, तो उनमे सवार महिला शौच क्रिया निपटाने के लिए सुरक्षित जगह की तलाश करते यहां-वहां भटकती नजर आती हैं। महिलाओं की इस विडंबना को देखने के बाद शासन-प्रशासन का एक बार फिर ध्यानाकर्षण कराने के लिए मुहिम तेज कर दी है।


सोशल मीडिया में चल रहा विरोध
शहर के बस स्टैंड में महिलाओ के लिए शौचालय की कमी का विरोध अब समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधियों के एक दल द्वारा सोशल मीडिया में करना शुरू कर दिया है। महिला शौचालय की कमी की जानकारी ऐसा नहीं है कि नगरीय प्रशासन एवं चुनिंदा जनप्रतिनिधियों को नहीं है, परंतु अपनी कमजोरी छुपाने के लिए हर बार इस संवेदनशील मुददे पर कोई न कोई फिजूल की बात लेकर मिटटी डालने की कोशिश की जाती है, जिसके बाद जनआक्रोश काफी बढऩे लगता है।


जगह की कमी का दे रहे हवाला
एक ओर महिला यात्रियों से शुल्क लेकर उन्हें शौचक्रिया करने की अनुमति दी जा रही है तो दूसरी ओर नगरीय प्रशासन के अधिकारी बस स्टैंड मे शुलभ शौचालय बनाने के लिए जगह ना रहने का हवाला दे रहे हैं। नगर पालिका के सीएमओ का भी यही कहना है। बस स्टैंड में चारों तरफ  अतिक्रमण नेे पांव पसार रखे हैं, जिसके कारण महिला यात्रियों के लिए शौचालय बनाने के लिए जगह की तलाश खत्म नहीं हो रही।