यहां की आदिवासी महिलाएं सीख रही हैं बांस और घांस से आभूषण बनाने की अद्भुत कला।

यहां की आदिवासी महिलाएं सीख रही हैं बांस और घांस से आभूषण बनाने की अद्भुत कला। बांस और सवई (दूब) घास से बनते हैं आकर्षक नेकलेस, अंगूठी, और चूड़ियां

यहां की आदिवासी महिलाएं सीख रही हैं बांस और घांस से आभूषण बनाने की अद्भुत कला।
बांस से निर्मित आभूषण का प्रदर्शन करतीं नीरा सरमा

यहां की आदिवासी महिलाएं सीख रही हैं बांस और घांस से आभूषण बनाने की अद्भुत कला

बांस और सवई (दूब) घास से बनते हैं आकर्षक नेकलेस, अंगूठी, और चूड़ियां

जशपुरनगर/लोक सीजी न्यूज़. जशपुर के कांसाबेल में यहां की ग्रामीण आदिवासी महिलाएं बांस और सवई घास से आभूषण बनाने की कला सीख रही हैं। इसके लिए, द बाम्बू लेडी के नाम से प्रसिद्व नीरा शर्मा इन दिनों जशपुर में हैं, जो पहले से बांस कला के उद्योग धंधे से जुड़ी महिलाओं को अब बांस से विभिन्न प्रकार के आभूषण बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं। 

           पन्द्रह दिवसीय इस विशेष कार्यशाला का आयोजन वनविभाग के संयुक्त वन प्रबंधन समितियों ने मिल कर किया है। डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि विभाग का लक्ष्य स्थानीय महिलाओं का कौशल विकास कर उनके लिए आय का अतिरिक्त साधन विकसित करना है। ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सके। 

असम की रहने वाली हैं बांस और सवई घास से आभूषण बनाने वाली कलाकार नीरा सरमा

जशपुर डीएफओ ने बताया कि नीरा शर्मा महिलाओं को बांस और सवई घास से आभूषण बनाने वाली कलाकार है। अपनी इस अद्भूत कला का जशपुर की महिलाओं का प्रशिक्षण देने के लिए वे कांसाबेल पहुंची है। कार्यशाला के लिए पहुंचने पर स्थानीय महिलाओं ने नीरा शर्मा का भव्य स्वागत किया। नीरा सरमा मूल रूप से असम की निवासी हैं। वे बांस और सवई (दूब) घास से विभिन्न प्रकार के आभूषण जैसे नेकलेस, अंगूठी, चूड़ी बनाती है। उनकी तैयार की गई इन कलाकृतियों को देश-विदेश में खूब मांग है। जानकारी के लिए बता दें कि जशपुर के ग्रामीण अंचल में भी महिलाओं द्वारा बांस से टोकरी,सूप और खजूर छिंदकासा से कई प्रकार की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।

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