*मांदर की थाप पर थिरका गोरिया, 22 गांवों ने दिखाई लोक संस्कृति की झलक*
*एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग में उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री विष्णु देव सहाय की धर्मपत्नी, कौशल्या साय ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह*
*मांदर की थाप पर थिरका गोरिया, 22 गांवों ने दिखाई लोक संस्कृति की झलक*
*एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग में उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री विष्णु देव सहाय की धर्मपत्नी, कौशल्या साय ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह*
लोक सीजी न्यूज / जशपुरनगर 13 सितम्बर 2026 :- मांदर की गूंज, लोकगीतों की मधुर तान और पारंपरिक वेशभूषा में थिरकते कलाकार... रविवार को गोरिया का माहौल पूरी तरह करमा के रंग में रंगा नजर आया। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तत्वावधान में आयोजित एकादशी करमा नृत्य अभ्यास वर्ग में क्षेत्र के 22 गांवों के करमा नृत्य दलों ने हिस्सा लिया। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुए आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय भी शामिल हुईं और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
एक साथ थिरके सैकड़ों कदम
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही पारंपरिक वेशभूषा में सजे करमा नृत्य दल आकर्षण का केंद्र बन गए। मांदर की थाप के साथ शुरू हुए सामूहिक नृत्य ने देखते ही देखते माहौल को उत्सव में बदल दिया। अलग-अलग गांवों से पहुंचे कलाकारों ने करमा नृत्य का अभ्यास करते हुए अपनी सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत की। ग्रामीण भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए।
इन संदेशों पर रहा जोर
- लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश
- युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का आह्वान
- प्रकृति के प्रति आस्था और सामाजिक एकजुटता पर जोर
- 22 गांवों के करमा दलों की सामूहिक भागीदारी
लोक परंपराएं हमारी पहचान : कौशल्या साय
कार्यक्रम में कौशल्या साय ने हिंदू धर्म की परंपराओं, तीज-त्योहारों और एकादशी करमा नृत्य के सांस्कृतिक महत्व पर बात रखी। उन्होंने कहा कि लोक परंपराएं और तीज-त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। करमा नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता, प्रकृति के प्रति आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना जरूरी है। युवा पीढ़ी को लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से परिचित कराने के साथ उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी समाज की है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
22 गांवों की भागीदारी ने बढ़ाई रौनक
अभ्यास वर्ग में 22 गांवों के करमा दल पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ पहुंचे। सामूहिक नृत्य और गीतों ने आयोजन को खास बना दिया। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण अंचल की लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर सुनील गुप्ता, उपेंद्र यादव, अनिता सिंह, विश्वनाथ सिदार, रविशंकर यादव, सुमन नाग, वीर सिंह, तेजकुमार चौहान, भीम राम चौहान, दिलीप चौहान, कृष्ण यादव, बालमती नाग, निरपति बाई, कल्याण आश्रम जशपुर के मनिजर राम, रविन्द्र शेखर, नंदकुमार सिंह, गौतम राय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन मौजूद रहे।
आयोजन का संदेश
करमा नृत्य के बहाने गोरिया में सिर्फ सांस्कृतिक रंग नहीं बिखरे, बल्कि अपनी परंपरा को बचाने, नई पीढ़ी को उससे जोड़ने और सामूहिकता की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।


