*जशपुर में करोड़ों की लागत से बना ठीबू नाला डेम बारिश में बहा! निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल*

*जशपुर में करोड़ों की लागत से बना ठीबू नाला डेम बारिश में बहा! निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल* *दशकों से भ्रष्टाचार को अंजाम देने के नाम से कुख्यात जलसंसाधन विभाग का एक और कारनामा*

*जशपुर में करोड़ों की लागत से बना ठीबू नाला डेम बारिश में बहा! निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल*

*जशपुर में करोड़ों की लागत से बना ठीबू नाला डेम बारिश में बहा! निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल*

*दशकों से भ्रष्टाचार को अंजाम देने के नाम से कुख्यात जलसंसाधन विभाग का एक और कारनामा*

लोक सीजी न्यूज / जशपुरनगर 8 सितम्बर  2026 :- अपने पिछले ईई के कारनामों से धूमिल हुई छवि से जशपुर का जल संसाधन संभाग अभी निकला भ नहीं था कि, विभाग के भ्रष्टाचार के एक और नए कारगुजारी से विभाग की किरकिरी हो रही है। 

        एक बार फिर जिले में हुई तेज बारिश ने जल संसाधन विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सन्ना तहसील के डुमरकोना पंचायत में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए ठीबू नाला डेम के बारिश के पानी का दबाव नहीं झेल पाने और बह जाने का मामला सामने आया है। डेम के क्षतिग्रस्त होने की खबर के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस डेम का निर्माण बारिश के पानी को रोकने और जल संरक्षण के उद्देश्य से किया गया था, वह तेज बारिश में ही पानी का दबाव नहीं झेल पाया। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

करोड़ों की परियोजना, पहली ही तेज बारिश में सवालों के घेरे में निर्माण

स्थानीय लोगों के अनुसार ठीबू नाला डेम का निर्माण जल संरक्षण और क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन तेज बारिश के बाद डेम के बहने के आरोप सामने आने से पूरी परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि डेम का निर्माण तकनीकी मानकों के अनुसार और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया गया होता तो सामान्य बारिश के बाद इस तरह की स्थिति सामने नहीं आती।

हालांकि, डेम के क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों की पुष्टि विभागीय और तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप

डेम निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य विभाग की निगरानी में कराया गया था। इसके बावजूद डेम के बहने की स्थिति सामने आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। जांच में डेम की डिजाइन, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत राशि और खर्च की गई राशि सहित निर्माण एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाए।

जनता के पैसे से बना डेम, जवाबदेही भी तय हो

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में खर्च होने वाली राशि जनता की होती है। ऐसे में करोड़ों रुपए की लागत वाली परियोजना के क्षतिग्रस्त होने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर डेम निर्माण में किस स्तर की गुणवत्ता अपनाई गई थी और निर्माण के दौरान विभागीय अधिकारियों ने किस तरह की निगरानी की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

ईई विनोद भगत ने कहा- टीम करेगी मौके पर जांच

मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के ईई विनोद भगत ने कहा कि विभाग की टीम मौके पर जाकर निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी या दोष सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।