संत अन्ना धर्म संघ के पांच धर्म संघीय बहनों ने सम्मान पूर्वक आजीवन व्रतधारण लिया

संत अन्ना धर्म संघ के पांच धर्म संघीय बहनों ने सम्मान पूर्वक आजीवन व्रतधारण लिया बिशप ने कहा कि समर्पण का जीवन वास्तव में चुनौतीपूर्ण है, फिर भी ईश्वर और लोगों की सेवा के लिए अत्यंत आवश्यक

संत अन्ना धर्म संघ के पांच धर्म संघीय बहनों ने सम्मान पूर्वक आजीवन व्रतधारण लिया
संत अन्ना धर्म संघ के पांच धर्म संघीय बहनों ने सम्मान पूर्वक आजीवन व्रतधारण लिया

संत अन्ना धर्म संघ के पांच धर्म संघीय बहनों ने सम्मान पूर्वक आजीवन व्रतधारण लिया

बिशप ने कहा कि समर्पण का जीवन वास्तव में चुनौतीपूर्ण है, फिर भी ईश्वर और लोगों की सेवा के लिए अत्यंत आवश्यक

लोक सीजी न्यूज़ / जशपुर 25 नवंबर 2025, मध्यप्रदेश- छत्तीसगढ़ प्रोविंस के संत अन्ना की पुत्रियों के धर्म संघ के पांच धर्मबहनें सिस्टर सुष्मिता कुजूर, सिस्टर दिव्य कुजूर, सिस्टर फिरमा पन्ना, सिस्टर लेकोदिया कुजूर एवं सिस्टर स्वेता टोप्पो ने रोजरी की महारानी महागिरजा कुनकुरी में सम्मान पूर्वक आजीवन व्रत धारण कर अपने को ईश्वर के लिए समर्पित किया।

इस अवसर पर मिस्सा पूजा के अतिरिक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संत अन्ना की पुत्रियों के धर्म संघ रांची के सुपीरियर जेनेरल सिस्टर लीली ग्रेस टोपनो डीएसए, प्रोविंशियल सुपीरियर सिस्टर मेरी कुसुम तिर्की डीएसए, सिस्टर मेरी पुष्पा तिर्की डीएसए, अन्य धर्मबहनें, फादर गण, उनके रिश्तेदार एवं श्रद्धालु भक्त उपस्थित हुए।

समारोही ख्रीस्तयाग के मुख्या अनुष्ठाता जशपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष एम्मानुएल केरकेट्टा डी. डी., सहअनुष्ठाता विकर जेनेरल फ़ादर मुक्ति प्रकाश मिंज, रेक्टर फ़ादर जेरोम मिंज एवं पुरोहित गणों थे। मिस्सा के दौरान पढ़े जाने वाले प्रथम पाठ व्रत धारी सिस्टर स्वेता टोप्पो तथा दूसरा पाठ व्रत धारी लेकोदिया कुजूर तथा सुसमाचार फ़ादर प्रफुल बड़ा के द्वारा पढ़ा गया।

बिशप एम्मानुएल केरकेट्टा ने कहा

इस अवसर पर अपने प्रवचन में बिशप ने कहा कि समर्पण का जीवन वास्तव में चुनौतीपूर्ण है, फिर भी ईश्वर और लोगों की सेवा के लिए अत्यंत आवश्यक है। ईश्वर स्वयं कहते हैं, "मैंने तुम्हें चुना है।" उन्होंने आपको परिवर्तन लाने के लिए चुना और बुलाया है। न्याय और समर्पण की भावना के साथ जब आप प्रभु का निमंत्रण स्वीकार करें, आपको विभिन्न स्थानों पर भेजेंगे। निस्वार्थ भावना से मानवता और कलीसिया की सेवा करें। प्रभु आपका मार्गदर्शन करेंगे। हमारा कार्य है सेवा-भाव से आगे बढ़ते हुए प्रभु की योजना को पूरा करना। जीवन में हमेशा सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन यह न भूलें कि प्रभु ने आपको चुना है—और वही आपको आगे बढ़ाएंगे तथा आपके हर कदम का साथ देंगे।

जीवन भर के लिए किया व्रतधारण

प्रवचन के पश्चात् व्रतधारण की विधि प्रारम्भ हुई। मुख्या अनुष्ठाता ने कलीसिया तथा संत अन्ना समाज के नियमानुसार व्रत धारियों से प्रश्न पूछा। तद्पश्चात ये व्रतधारी धर्मबहनें ईश्वर का नाम लेकर जीवन भर के लिए व्रतधारण किया।