*37 अधिकारियों के तबादले से नगरीय व्यवस्था को मिलेगा नया संबल* *नगर पालिका, नगर पंचायत के कई सीएमओ इधर से उधर, देखें लिस्ट*

*37 अधिकारियों के तबादले से नगरीय व्यवस्था को मिलेगा नया संबल* *नगर पालिका, नगर पंचायत के कई सीएमओ इधर से उधर, देखें लिस्ट*

*37 अधिकारियों के तबादले से नगरीय व्यवस्था को मिलेगा नया संबल*  *नगर पालिका, नगर पंचायत के कई सीएमओ इधर से उधर, देखें लिस्ट*

*37 अधिकारियों के तबादले से नगरीय व्यवस्था को मिलेगा नया संबल*

*नगर पालिका, नगर पंचायत के कई सीएमओ इधर से उधर, देखें लिस्ट*

लोक सीजी न्यूज / रायपुर 18 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्यभर में व्यापक फेरबदल करते हुए 20 मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) समेत कुल 37 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं।

इस निर्णय को शासन की सक्रियता और जमीनी स्तर पर सुधार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से कई नगरीय निकाय प्रभारी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रहे थे, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही थीं। नई व्यवस्था के तहत अब नगर पालिकाओं और जिला मुख्यालयों में नियमित CMO की नियुक्ति को प्राथमिकता दी गई है, जिससे प्रशासनिक स्थिरता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

मूल पदों पर वापस भेजे गए 6 जूनियर कर्मचारी जो सीएमओ के पद पर थे

फेरबदल के दौरान 6 सहायक राजस्व अधिकारियों और जूनियर कर्मचारियों को, जो अब तक प्रभारी CMO के रूप में कार्यरत थे, उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि शासन अब महत्वपूर्ण पदों पर योग्य और नियमित अधिकारियों की तैनाती को प्राथमिकता दे रहा है।

हालांकि, राज्य में नियमित CMO की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए कुछ नगरीय निकायों में वरिष्ठ कर्मचारियों को अस्थायी रूप से प्रभारी CMO का दायित्व सौंपा गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यों में कोई बाधा न आए।

सरकार का मानना है कि इस प्रशासनिक बदलाव से शहरी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। साथ ही सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधाओं में भी सुधार देखने को मिलेगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह फेरबदल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर इसे दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल बताया जा रहा है, वहीं यह भी संकेत देता है कि सरकार अब नगरीय निकायों के कार्यों को लेकर अधिक गंभीर और प्रतिबद्ध हो गई है।