जिला एवं विकासखंड स्तर पर गौसेवा समितियों का हुआ गठन जशपुर जिले के अध्यक्षों व सदस्यों की हुई नियुक्ति
जिला एवं विकासखंड स्तर पर गौसेवा समितियों का हुआ गठन मदन सोनी जशपुर जिला अध्यक्ष नियुक्त
जिला एवं विकासखंड स्तर पर गौसेवा समितियों का हुआ गठन
जशपुर जिले के अध्यक्षों व सदस्यों की हुई नियुक्ति
लोक सीजी न्यूज़/नवा रायपुर /10 अक्टूबर 2025:- छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विकास विभाग ने गौसेवा आयोग अधिनियम 2004 के तहत जिला एवं विकासखंड स्तरीय समितियों का पुनर्गठन कर अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। इस संबंध में मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर, अटल नगर से 6 दिसंबर को आदेश जारी किया गया है। आदेश पर विभाग के उप सचिव सूर्यकिरण अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं।
जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग नियम 2005 (संशोधित) के नियम 16-क के तहत गठित इन समितियों को प्रदेश में पंजीकृत गौशालाओं के निरीक्षण, पर्यवेक्षण एवं आयोग से संबंधित अधिनियमों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही ये समितियां किसानों और गौशाला प्रतिनिधियों को जैविक खेती, जैविक खाद एवं पंचगव्य उत्पादन के महत्व पर प्रशिक्षण भी देंगी।
आदेश के अनुसार जिला स्तरीय समिति प्रत्येक दो माह में एक बार तथा विकासखंड स्तरीय समिति प्रत्येक माह में एक बार बैठक करेगी। गौशालाओं के निरीक्षण और अनुदान के उपयोग की रिपोर्ट त्रैमासिक रूप से आयोग को भेजी जाएगी।
जिला स्तरीय समिति, जशपुर
अध्यक्ष – श्री मदन राम सोनी, जशपुरनगर (मो. 9424252282)
सदस्य – भोज राम साहू (पत्थलगांव), अरविंद राम यादव (दुलदुला), विष्णु कुमार सोनी (कुनकुरी), संजय राम भगत (मनोरा) और अनुक राम नागेष (बगीचा)।
विकासखंड स्तरीय समितियां
जशपुर विकासखंड: अध्यक्ष – गजानंद साय (टुबुटोली)
दुलदुला विकासखंड: अध्यक्ष – संतुराम चौहान (केन्दपानी)
कांसाबेल विकासखंड: अध्यक्ष – हेमराज राय (कांसाबेल)
कुनकुरी विकासखंड: अध्यक्ष – दिनेश राम (बेहराटोली)
फरसाबहार विकासखंड: अध्यक्ष – रोहित अवस्थी (पेयमारा)
बगीचा विकासखंड: अध्यक्ष – सुखसाय राम (बच्छसंव)
मनोरा विकासखंड: अध्यक्ष – संजय राम भगत (डउमांव)इन समितियों में प्रत्येक विकासखंड से पांच सदस्य शामिल किए गए हैं, जो अपने क्षेत्र की गौशालाओं का निरीक्षण कर उनकी स्थिति, सुविधाएं और पशुधन स्वास्थ्य से संबंधित प्रतिवेदन जिला समिति को प्रस्तुत करेंगे।
राज्य शासन ने सभी सदस्यों की नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए की है। शासन को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी समय समिति को निरस्त कर सके।


