*निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीज को हर महीने मिलने वाली राशि का किया गया है बंदरबांट*

*निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीज को हर महीने मिलने वाली राशि का किया गया है बंदरबांट*

*निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीज को हर महीने मिलने वाली राशि का किया गया है बंदरबांट*

*टीबी मरीजों के नाम पर 2.40 लाख रुपए की राशि गड़बड़ी की शिकायत पर जांच समिति गठित*

*कलेक्टर ने 15 दिवस के भीतर रिपोर्ट देने के दिए निर्देश*

*निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के मरीज को हर महीने मिलने वाली राशि का किया गया है बंदरबांट*

लोक सीजी न्यूज / जशपुरनगर 30 मार्च 2026/ टीबी मरीजों के नाम पर 2.40 लाख रुपए की गड़बड़ी संबंधी शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

        इस संबंध में कलेक्टर रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार गठित जांच समिति पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर 15 दिवस के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।

       कलेक्टर ने समिति के सदस्यों को सभी तथ्यों, दस्तावेजों एवं संबंधित अभिलेखों का परीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। सीएमएचओ डॉ जात्रा ने कहा है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाता है तथा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

निक्षय पोषण योजना (NTEP) में भारी अनियमितताओं का मामला आया सामने 

जशपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित निक्षय पोषण योजना (NTEP) में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। एक शिकायतकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर को दिए गए आवेदन के अनुसार टीबी मरीजों के नाम पर करीब ₹2,40,000 की राशि के गबन का आरोप लगाया गया है। शिकायत में विभाग के कई कर्मचारियों—जिनमें डीपीसी, लेखापाल, प्रभारी लेखापाल, पीपीएम कोऑर्डिनेटर और एचआर कर्मचारी शामिल हैं—पर मिलीभगत से फर्जी भुगतान करने का आरोप है।

शिकायत के अनुसार निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को मिलने वाली आर्थिक सहायता वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंचाई गई, बल्कि कई मामलों में यह राशि अन्य व्यक्तियों या रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। संलग्न दस्तावेज़ों में दर्ज सूची से पता चलता है कि कई मरीजों के नाम और बैंक खाताधारकों के नाम अलग-अलग हैं। इतना ही नहीं, जशपुर जिले के मरीजों के खाते अन्य जिलों जैसे बिलासपुर, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा में पाए गए हैं, जो पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बनाता है।