*दोकड़ा में श्रद्धा-उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा रथयात्रा*
हेडिंग: दोकड़ा में श्रद्धा-उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा रथयात्रा सब हेडिंग: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय व पुत्र विनोद साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरा, अब सुना वेश, अधर पाना और नीलाद्री विजय के होंगे विशेष अनुष्ठान दोकड़ा (जशपुर)। विकासखंड कांसाबेल के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की बहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई। मौसीबाड़ी में नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देने के बाद महाप्रभु भव्य रथ पर विराजमान होकर पुनः श्री मंदिर के लिए रवाना हुए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" के जयघोष, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। रथयात्रा में इस वर्ष मंदिर के गजपति के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय और पुत्र विनोद साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गजपति महाराजा की परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की तथा विधिवत पूजा के बाद बहुड़ा रथयात्रा का शुभारंभ कराया। बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा श्री मंदिर परिसर लौट आए हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार तीन दिनों तक रथ पर ही विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर समिति के अनुसार शनिवार को भगवान का भव्य सुना वेश (सोना वेश) होगा, जिसमें महाप्रभु को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। रविवार को अधर पाना की परंपरा निभाई जाएगी, जबकि सोमवार को नीलाद्री विजय के अवसर पर भगवान पुनः श्री मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगे। नीलाद्री विजय की परंपरा के तहत भगवान श्री जगन्नाथ माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित कर उनका मान-मनौव्वल करेंगे। मान्यता है कि रथयात्रा पर बिना बताए चले जाने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और भगवान रसगुल्ला भेंट कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। उल्लेखनीय है कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा वर्ष 1942 से लगातार आयोजित की जा रही है। आज यह आयोजन छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। बहुड़ा रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि व कल्याण की कामना की।
*दोकड़ा में श्रद्धा-उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा रथयात्रा*
*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय व पुत्र विनोद साय ने निभाई छाया गजपति महाराजा की परंपरा*
लोक सीजी न्यूज / दोकड़ा (जशपुर)। विकासखंड कांसाबेल के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में शुक्रवार शाम को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की बहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई।
मौसीबाड़ी में नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देने के बाद महाप्रभु भव्य रथ पर विराजमान होकर पुनः मंदिर के लिए रवाना हुए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" के जयघोष, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
रथयात्रा में इस वर्ष मंदिर के गजपति के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुत्री स्मृति साय और पुत्र विनोद साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर छाया गजपति महाराजा की परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की तथा विधिवत पूजा के बाद बहुड़ा रथयात्रा का शुभारंभ कराया।
बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा श्री मंदिर परिसर लौट आए हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार तीन दिनों तक रथ पर ही विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
मंदिर समिति के अनुसार शनिवार को भगवान का भव्य सुना वेश (सोना वेश) होगा, जिसमें महाप्रभु को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। रविवार को अधर पाना की परंपरा निभाई जाएगी, जबकि सोमवार को नीलाद्री विजय के अवसर पर भगवान पुनः श्री मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगे।
नीलाद्री विजय की परंपरा के तहत भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित कर उनका मान-मनौव्वल करेंगे। मान्यता है कि रथयात्रा पर बिना बताए चले जाने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और भगवान रसगुल्ला भेंट कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
उल्लेखनीय है कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा वर्ष 1942 से लगातार आयोजित की जा रही है। आज यह आयोजन छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। बहुड़ा रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि व कल्याण की कामना की।


